हाल ही में असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के अंतिम मसौदे को जारी किया गया जिसके अनुसार 40 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है,उल्लेखनीय है कि एनआरसी में शामिल होने के लिये 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था जिनमें से 2.89 करोड़ लोगों के नाम ही एनआरसी द्वारा जारी अंतिम सूची में शामिल हैं,इस बात को लेकर सड़क से लेकर संसद तक चर्चाएँ जारी थी
परिवार का नाम नागरिकता रजिस्टर में न आने पर डमरू अगर भन्नाए हुए हैं तो 22 सालों से संघ और बीजेपी से जुड़ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के संसद में दिए ’40 लाख घुसपैठिये’ वाले बयान पर लोग ऐतराज़ जता रहे हैं और यकीन भी नहीं, क्योंकि समय बीतने के साथ-साथ ये साफ़ हो रहा है कि एनआरसी से बाहर रखे गए 40 लाख लोगों में से ज़्यादातर संख्या हिंदुओं की है।

हालांकि अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है और ये संख्या 20-22 लाख तक बताई जा रही है, लेकिन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ नेता ओशीम दत्ता असम नागरिकता रजिस्टर से बाहर रह गए हिंदुओं की संख्या 30 लाख तक बताते हैं।
पिता और चाचा की जायदाद साझी थी इसलिए श्याम सुंदर जायसवाल के पास कोई दस्तावेज़ नहीं, जो थे वो 1950 के असम भूकंप की भेंट चढ़ गए जब सादिया और पास के इलाक़े की आबादी का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया था.

पान और पंचर लगाने की दुकान चलाने वाले 51-साल के श्याम सुंदर जायसवाल का परिवार तीन पीढ़ी पहले असम आया था, लेकिन अब उनका सवाल एक ही है असम से निकाले गए तो जाएंगे कहां और अगर निकाले न भी गए तब लोग कह रहे हैं कि एनआरसी में नाम नहीं शामिल होने पर न राशन का कोटा मिलेगा, न वोटर कार्ड और न ही बैंक खाता खुल सकेगा, और ना ही जायदाद ले पाएंगे,वो बड़े फिक्रमंद लहजे में कहते हैं।

पास बैठे बेटे मिंटू जायसवाल कहने लगते हैं कि शादीशुदा बहन की नौकरी का बुलावा आ गया है, उसे एनआरसी सर्टिफिकेट जमा करना है, सुसराल से बार-बार तकाज़ा आ रहा है मगर कुछ समझ में नहीं आ रहा क्या करें?

हेडगवार, गोलवलकर और शिवाजी की तस्वीरों वाले अपने कार्यालय में बैठे चंद्र प्रकाश जायसवाल कहते हैं,आज तीन रुपये किलो पर ग़रीब परिवार के प्रत्येक सदस्य को मिल रहा पांच किलो चावल, बीपीएल गैस कनेक्शन, सभी सरकारी योजनाओं का लाभ, यहां तक कि जाति प्रमाण पत्र तक बनाना नामुमकिन हो जाएगा।

साइनाकी गांव में चाय के बागान में काम कर रहीं लोक्खी घटवार के पास ख़ाली पैन कार्ड और राशन कार्ड है, वोटर कार्ड मालिक के पास है,जिसने उसे भरोसा दिलाया है कि वो उसका एनआरसी बनवा देगा।

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