उज्जैन कुंभ में स्नान के लिए जो हिन्दू आए हुए थे बारिश के वजह से उनके रुकने का इन्तिजाम तोपखाना हरी मस्जिद में किया गया अचानक हुए तेज़ बारिश में श्रद्धालुओं के लिए कोई इंतिज़ाम न होने के कारण एक मस्जिद में उनके रुकने और सोने का इंतिज़ाम किया गया आज राजनीतिक फायदे के लिए चाहे जितना हिंदू मुस्लिम में ज़हर घोल जाए मगर लोग अब इस नफरत की राजनीति को समझने लगे हैं।
अगर इतिहास की बात की जाए तो
हमारे इतिहास में धार्मिक सद्भावना के अनेक प्रेरणादायक उदाहरण मौजूद हैं। यदि इतिहास को निष्पक्ष ढंग से पढ़ा जाए, तो साफ हो जाएगा कि मध्यकालीन भारत में अनेक हिंदू तीर्थ-स्थलों को मुस्लिम शासकों का संरक्षण व सहायता प्राप्त हुई। इन तीर्थ-स्थलों के विकास में उस सहायता का महत्वपूर्ण योगदान था।
मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के लगभग 35 मंदिरों के लिए मुगल शासकों अकबर, जहांगीर व शाहजहां से सहायता मिलती रही। इसके दस्तावेज आज तक उपलब्ध हैं। लगभग 1,000 बीघे जमीन की व्यवस्था इन मंदिरों के लिए की गई थी। इन दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि इनकी तरह-तरह की समस्याएं सुलझाने में मुगल शासकों और उनके अधिकारियों ने बहुत तत्परता दिखाई। इसी तरह अवध के नवाबों और उनके अधिकारियों ने अयोध्या में अनेक मंदिर बनवाए, उनकी मरम्मत करवाई व उनके लिए जमीन दान दी। नवाब सफदरजंग ने अयोध्या में हनुमानगढ़ी मंदिर बनाने के लिए जमीन दी। आसफउद्दौल्ला के दीवान ने भी इस मंदिर के लिए सहायता दी थी।
एक मुगल शासक ने चित्रकूट में बालाजी के मंदिर के लिए 330 बीघे करमुक्त जमीन की व्यवस्था की, जिसका दस्तावेज अब तक मंदिर में मौजूद है।

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