नई दिल्ली-गुजरात के जूनागढ़ से 15 किलोमीटर दूर तोरणिया गांव की गोशाला से करीब 600 गायों के गायब होने से प्रशासन मे हड़कंप मच गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इलाके में जब गाय सड़कों या अन्य जगहों पर मिलती थीं तब उन्होंने गोशाला भेज दिया जाता है, लेकिन गोशाला में करीब 600 गाय कम हो गई हैं। मामले में जब गोशाला के मालिक और मैनेजर से पूछा गया तो उन्होंने बेतुका जवाब देते हुए कहा कि एक साल के दौरान इन गायों की मौत हो गई है।

गोशाला मालिक का यह भी कहना है कि अधिकर गाय प्लास्टिक खाकर बीमार पड़ गई और उनकी बाद में मौत हो गई। मामले में जेएमसी यानी जूनागढ़ नगर निगम की डिप्टी नगरपालिका आयुक्त एमके नंदिनी ने बताया कि यह सच है कि गोशाला मालिक को जितनी गाय दी गईं उनमें बहुत सी लापता है। पिछले साल करीब 789 गाय गोशाला भेजी गईं। हालांकि अब गोशाल को नोटिस भेजा गया है जिसमें एक साल के भीतर भेजी गई गायों की जानकारी और मरी गायों की जानकारी देने को कहा गया है। इसमें अगर कोई गड़बड़ पाई गई तो एफआईआर दर्ज की जाएगी।

बता दें कि सिविक बॉडी एक गाय के रखरखाव के लिए गोशाला को तीन हजार रुपए का भुगतान करती है। सरकारी पशुचिकित्सा डॉक्टर हेमल गुजराती कहते हैं कि गोशाला में किसी भी जानवर की मौत से जुड़ी उन्हें जानकारी नहीं मिली है। आमतौर पर इतनी बड़ी संख्या में जानवरों की मौत महामारी की वजह से होती है लेकिन गोशाला में किसी भी तरह की बीमारी का प्रकोप नहीं है।

हालांकि गोशाला के मालिक धीरु सवालिया ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। टीओआई से उन्होंने कहा, ‘मैंने कोई गाय नहीं बेची है। पिछले छह-सात महीनों में ही करीब 450 गायों की मौत हो चुकी है। जब गायों को यहां भेजा गया वो पहले ही बीमार थीं। उन्होंने काफी प्लास्टिक खा रखी थी। इसके गवाह गांव वाले भी हैं। यह बिल्कुल सच है कि गोशाला में रोज एक या दो गायों की मौत होती रही है। मैंने मौखिक रूप से पशुचिकित्सक को इसकी जानकारी भी दी। इसके जवाब में डॉक्टरों ने कहा कि अगर गाय प्लास्टिक की वजह से मर रही हैं तो वो कुछ नहीं कर सकते हैं।

बता दें कि गोशाला में गायों की संख्या में कमी की जानकारी ऐसे समय में सामने आई जब स्थानीय राजनेताओं ने इस मुद्दों को उठाया। पशु कार्यकर्ताओं ने भी गोशाला के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। जूनागढ़ नगर निगम स्टैंडिंग कमेटी ने भी गोशाला मालिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राज्य पशु कल्याण बोर्ड ने तो इसे बड़ा घोटाला बताया है। मेयर अद्यशक्ति मजूमदार ने कहा है कि जीएमसी ने शुरुआती जांच शुरू कर दी है। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

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