टर्की- तैयब अर्दोग़ान मुस्लिम मुमालिक का एक बड़ा और बेख़ौफ़ चेहरा जिसने कभी अमेरिका,रूस,इज़रायल के आगे कोई समझौता नही किया आज तैयब अर्दोग़ान फिर अबने बयान से सुर्खियों में हैं तबने बयान में उन्होंने कहा है कि हम अपने मित्र देशों के सहयोग से बैतुल मुक़द्दस के विरुद्ध होने वाले षडयंत्र का मुक़ाबला करते हुए उसे विफल बना देंगे तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोग़ान ने सोमवार को न्यूयार्क में कहा कि तुर्की और बैतुल मुक़द्दस का समर्थन करने वाले देश इस बात की अनुमति नहीं देंगे कि शांति एवं कई धर्मों की उत्पत्ति वाला नगर इस्राईल के वर्चस्ववाद का शिकार बनकर रह जाए।

उन्होंने कहा कि इस्राईल, मुसलमानों के बीच मतभेदों का दुरूपयोग करके यह प्रयास कर रहा है कि मुसलमानों के पहले क़िब्ले को उनकी याद से निकाल दे अर्दोग़ान ने कहा कि अतिवादी ज़ायोनी, इस्राईल की सहायता से क़ुद्स का तानाबान ख़राब करने के प्रयास कर रहे हैं,तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के भीतर सुधार पर बल देते हुए संसार, वीटो का अधिकार प्राप्त पांच देशों से बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा कि न्याय की स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के सही 194 सदस्यों को चरणबद्ध ढंग से वीटो का अधिकार दिया जाना चाहिए। अर्दोग़ान ने कहा कि इस्राईल के विरुद्ध सुरक्षा परिषद में कोई प्रस्ताव पारित कराना इसलिए सरल नहीं है क्योंकि यदि उसका कोई एक सदस्य भी वीटो कर देता है तो एेसे में यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाता। तुर्की के राष्ट्रपति ने अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा अमरीकी दूतावास को तेलअवीव से बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित करने की कड़ी आलोचना की। इस से पहले भी एर्दोगान बैतुल मुक़द्दस के लिए आवाज़ उठा ते रहे हैं ।

अलअक़्सा के हवाले से चन्द बातें समझनी बहुत ज़रूरी हैं,मुसलमानों का ईमान है कि मस्जिद अलअक़्सा हज़रत आदम के ज़माने की है और रू ए ज़मीन पर दूसरी मस्जिद है,इस्लामी तारीख़ में मस्जिद अलअक़्सा को क़िबला ए अव्वल कहकर पुकारा जाता है यानी नबी ए करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के ज़माने में जब तक काबा पर मुशरिको का क़ब्ज़ा था, मुसलमान अलअक़्सा की तरफ़ मुँह करके नमाज़ पढ़ते थे।

उन्होंने कहा नबीए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 17 महीनों तक मस्जिद अल अक़्सा की तरफ़ रुख़ करके नमाज़ अदा की है,अल अक़्सा का 35 एकड़ का इहाता है जिसमें इस्लामी तारीख़ के 44 आसारे क़दीमा मौजूद हैं,मस्जिद अलअक़्सा मशरीक़ी यरूशलम यानी शुमारी जेरुसलम में है,दूसरी आलमी जंग के बाद जब फ़िलस्तीन पर इस्राइल नाम के सहयूनियों का क़ब्ज़ा हो गया तब भी मस्जिद अलअक़्सा फ़िलस्तीन का हिस्सा मानी गई है,जिसे कोई बदल नही सकता।

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