देवबंद-देशभर में दारुल उलूम देवबंद को एक सम्मान और प्रतिष्ठा की नज़रों से देखा जाता है,मुसलमानों के लिये दारुल उलूम की अपील और राय आखरी फैसले की तरह होती है,क्योंकि दारुल उलूम देवबंद देश की सबसे पुरानी शैक्षिक संस्थान है,जिसने आज़ादी में बड़ा महत्वपूर्ण योगदान दिया है,जिसको भुलाया नही जासकता है.

लेकिन मीडिया हमेशा उनके तमाम योगदान को नज़रअंदाज़ करके सिर्फ आधे अधूरे फतवे उछाल कर दारुल उलूम की छवि धूमिल करने के लिये और मुसलमानों का भरोसा खत्म करने के लिये बदनाम करती रहती है,जिसका दारुल उलूम की तरफ से कोई किसी भी प्रकार की कार्यवाही न होने के कारण इनके हौसले बुलंद हैं.

आजकल सीसीटीवी कैमरों को लेकर मीडिया ने शोर शराबा मचाया हुआ है कि दारुल उलूम देवबंद ने CCTV कैमरे लगाने को हराम बताया है,लोग इस मसले की हक़ीक़त को जाने बिना आधी अधूरी जानकारी को शेयर कर रहे हैं,और दारुल उलूम पर उंगलियाँ उठा रहे हैं.

जबकि दारुल उलूम की तरफ से इस प्रकार का कोई फ़तवा जारी नही किया गया था,बल्कि एक वयक्ति ने दारुल उलूम से सवाल पूछा था कि- हमारे मोहल्ले की मस्जिद में CCTV कैमरे लगे हुए हैं उनको लगाने की वजह “जूते चप्पलों की चोरी को रोकना है”, इसके अलावा उसने ये भी बताया कि कैमरे लगाने वाले लोग तर्क ये दे रहे हैं कि “कैमरे तो मस्जिद अल हरम” में भी लगे हुए हैं, उसने ये भी कहा की कैमरे का मॉनिटर मस्जिद के अंदर है और कैमरे में आने वाली तस्वीर मस्जिद के अंदर प्रकाशित होते हैं.

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