हालिया उप चुनावों में विपक्षी एकता ने बीजेपी को न केवल राजनीतिक पटखनी दी है बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर उसकी नींद भी उड़ा दी है। पालघर चुनावों में भी शिवसेना और बीजेपी के बीच काफी तल्खी देखी गई। इस लिहाज से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने सबसे पुराने सहयोगी शिवसेना के साथ रिश्तों में आई खटास को खत्म करने की कवायद शुरू की है। माना जा रहा है कि इसी कोशिश में अमित शाह बुधवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के मुंबई स्थित घर मातोश्री में जाकर मुलाकात करेंगे। हालांकि, बीजेपी की तरफ से इसे ‘समर्थन के लिए संपर्क’ यात्रा का एक हिस्सा माना जा रहा है मगर राजनीतिक जगत में इस मुलाकात के मायने अलग हैं। कहा जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी अपनी मौजूदा सरकार के आखिरी साल में संभवत: आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार करने वाले हैं।

इसलिए भी बीजेपी सहयोगी दलों से संपर्क में है ताकि इसी बहाने 2019 के सियासी समीकरण भी बनाए जा सकें।हालिया उप चुनावों में विपक्षी एकता ने बीजेपी को न केवल राजनीतिक पटखनी दी है बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर उसकी नींद भी उड़ा दी है। पालघर चुनावों में भी शिवसेना और बीजेपी के बीच काफी तल्खी देखी गई। इस लिहाज से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने सबसे पुराने सहयोगी शिवसेना के साथ रिश्तों में आई खटास को खत्म करने की कवायद शुरू की है। माना जा रहा है कि इसी कोशिश में अमित शाह बुधवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के मुंबई स्थित घर मातोश्री में जाकर मुलाकात करेंगे। हालांकि, बीजेपी की तरफ से इसे ‘समर्थन के लिए संपर्क’ यात्रा का एक हिस्सा माना जा रहा है मगर राजनीतिक जगत में इस मुलाकात के मायने अलग हैं। कहा जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी अपनी मौजूदा सरकार के आखिरी साल में संभवत: आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार करने वाले हैं। इसलिए भी बीजेपी सहयोगी दलों से संपर्क में है ताकि इसी बहाने 2019 के सियासी समीकरण भी बनाए जा सकें।

साल 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए को न केवल पूर्ण बहुमत मिला बल्कि देशवासियों ने उन्हें प्रचंड जीत दिलाई लेकिन धीरे-धीरे एनडीए के घटक दलों में बीजेपी नेतृत्व और पीएम मोदी के खिलाफ असंतोष बढ़ता चला गया। सहयोगियों ने आरोप लगाया कि सरकार में उनकी नहीं चलती और पीएम मोदी ने जो वादा किए थे उसे पूरे करने में नाकाम रहे। एनडीए में सबसे पहले विद्रोह का बिगुल शिवसेना ने ही फूंका। शिवसेना ने जीएसटी, नोटबंदी समेत कई मुद्दों पर मोदी सरकार की आलोचना की और एनडीए से अलग होने का एलान किया। हालांकि, उसके मंत्री अभी भी महाराष्ट्र और केंद्र सरकार में शामिल हैं।

एनडीए के दूसरे बड़े घटक दल तेलुगु देशम पार्टी ने भी इस साल के शुरु में न केवल मोदी सरकार से अपना नाता तोड़ लिया बल्कि एनडीए से भी बाहर हो गया। इन दो बड़ी पार्टियों के अलग होने से एनडीए कमजोर पड़ने लगा है। अन्य राज्यों में भी कई छोटे दल एनडीए से नाराज बताए जा रहे हैं। बिहार में भी एनडीए के घटक दल (जेडीयू, आरएलएलपी) टीम मोदी से खुश नहीं हैं। इन सबके बीच विपक्षी दलों की एकजुटता रंग ला रही है। कर्नाटक में विपक्षी एका की वजह से ही बीजेपी की सरकार बनकर भी गिर गई। ऐसी स्थिति में बीजेपी अध्यक्ष ने पुराने साथियों को साधना ही बेहतर विकल्प समझा। इस लिहाज से सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिलने का कार्यक्रम तय हुआ।बता दें कि मोदी सरकार के चार साल होने के उपलक्ष्य में बीजेपी ने सभी मंत्रियों और सांसदों को समर्थन के लिए संपर्क यात्रा करने का निर्देश दिया है और करीब एक लाख लोगों से मिलने की योजना बनाई है। इसी क्रम में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अब तक अलग-अलग क्षेत्र के पांच दिग्गजों से मुलाकात कर चुके हैं। इनमें पूर्व सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह सुहाग, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, मशहूर क्रिकेटर कपिल देव, योग गुरू बाबा रामदेव, पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर सी लोहाटी शामिल हैं। शाह उनसे मुलाकात के दौरान मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियों से उन्हें अवगत कराते हैं और आगे के लिए समर्थन भी मांगते हैं।

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