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ब्रह्मा मंदिर पहुंच कर भी मंदिर के अंदर नही जा पाए राष्ट्रपति,विज़िटर बुक भी नही दी गई।

अजमेर-राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ब्रह्माजी के दर्शन के लिए उनकी प्रतिमा तक नहीं पहुंच जाए। उन्हें मंदिर की सीढ़ियों पर ही विशेष व्यवस्था कर बनाए गए स्थान पर पूजा अर्चना करनी पड़ी। राष्ट्रपति का काफिला सोमवार को सुबह 11.32 बजे ब्रह्माजी के मंदिर के पास पहुंचा मंदिर के पुजारी लक्ष्मी निवास वशिष्ठ ने कार से उतरते ही राष्ट्रपति का बुके देकर स्वागत किया। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि ब्रह्माजी का आज विशेष शृंगार किया गया है, आप मंदिर में पधारिए लेकिन उन्होंने मना कर दिया और दस सीढ़ियां चढ़कर वहीं से पूजा अर्चना कर ब्रह्माजी की आरती की।

राष्ट्रपति कोविंद, उनकी पत्नी एवं पुत्री को पुजारी लक्ष्मी निवास वशिष्ठ एवं कृष्णगोपाल वशिष्ठ ने परंपरागत विधि विधान एवं मंत्रोच्चारण के साथ पूजा करवाई। पुजारियों ने कोविंद एवं उनके परिवार को इलायची एवं रूद्राक्ष की माला पहनाकर एवं शॉल व चुनरी भेंट कर स्वागत किया। राष्ट्रपति को ड्राईफ्रूट्स व पुष्कर के प्रसिद्ध मालपुए का प्रसाद दिया गया।

इसलिए नहीं कर पाए दर्शन
राष्ट्रपति की पत्नी के स्वास्थ्य को देखते हुए बदली व्यवस्था राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद के स्वास्थ्य को देखते हुए रविवार की रात को पूजा अर्चना की व्यवस्था में प्रशासन ने बदलाव कर दिया। मंदिर की 40 सीढ़ियां हैं,बताते हैं कि पैर में परेशानी होने की वजह से उनकी पत्नी ब्रह्मा मंदिर की पूरी सीढ़ियां चलने में असमर्थ थीं यही वजह है कि मंदिर की दस सीढ़ियाें पर बीच में लगे लोहे के दो पोल हटाकर व्यवस्था की गई।

पहले भी हो चुका है ऐसा- स्वास्थ्य कारणों की वजह से राष्ट्रपति अपनी पत्नी व पुत्री के साथ ब्रह्मा जी मंदिर तक नहीं पहुंच पाने का यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी दो बार ऐसा हो चुका है। राज्यपाल कल्याण सिंह व केंद्रीय गृह मंत्री रहते ज्ञानी जैल सिंह ने भी मंदिर में नहीं जाकर नीचे से ही ब्रह्माजी को नमन किया आैर आरती की।

विजिटर बुक ही नजर नहीं आई वीआईपी आगमन के दौरान अमूमन विजिटर बुक दी जाती है जिसमें वो अपना संस्मरण लिखते हैं। लेकिन सोमवार को ब्रह्माजी मंदिर परिसर में प्रबंधन कमेटी व पुजारी ने राष्ट्रपति के सामने विजिटर बुक नहीं रखी। पुजारी लक्ष्मी निवास वशिष्ठ को तो विजिटर बुक की जानकारी तक नहीं थी और ना ही यह बुक किसी को नजर आई।

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