आज मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर एस.पी सिंह साहब को स्वरूपरानी चिकित्सालय में चल रही अव्यवस्थाओं के संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को ऋचा सिंह ने ज्ञापन देकर तत्काल उचित क़दम उठाने का अनुरोध किया गया।
ज्ञापन देने वालों में निर्मला यादव, प्रमोद यादव, गुलाबचंद्र पिंटू, शकील, अरविंद सरोज, अजीत, रोहित गुप्ता, मृत्युंजय पांडेय शामिल रहे।

ज्ञापन संलग्न

सेवा में
प्रधानाचार्य
मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज
प्रयागराज

विषय: मरीज़ों को अस्पताल में दवाएं और चिकित्सा जाँच की सुविधा न मिलने और सरकारी डॉक्टरों द्वारा बाहर की निजी दुकानों की दवा लिखने के संबंध में।

महोदय,
स्वरूपरानी अस्पताल में फ़ैली अव्यवस्था आम आदमी को स्वास्थ्य सुविधा जैसी मूलभूत आवश्यकता से वंचित करने वाली है।
अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली दवाई एवं जांचों की सुविधा पूरी तरह से ठप्प है।
मरीज़ों का कहना है कि डॉक्टर जो दवाएं लिखते है, वो अस्पताल के सरकारी दवाखाने में नहीं मिलती हैं । डॉक्टरों के द्वारों अस्पताल के बाहर की दुकानों का नाम लिखकर उन दुकानों से दवा लाने पर इलाज शुरू किया जाता है।
अस्पताल में जाँच की सुविधा भी मरीज़ों को नहीं मिल रही, बाहर की निजी पैथोलॉजी के एजेंट अस्पताल में खिले आम सक्रिय हैं और डॉक्टरों द्वारा उन्हीं एजेंटों के माध्यम से मरीजों पर जांच कराने के मजबूर किया जाता है।
सरकारी अस्पताल में पूरी तरह से अराजकता की स्थिति बनी हुई है जो बेहद शर्मनाक है।
एक तरफ़ अस्पताल के बाहर आयुष्मान प्रधानमंत्री योजना के बड़े-2 विज्ञापन लगे हुए हैं, जिसमें ग़रीब व्यक्ति के लिये 5 लाख तक के मुफ्त इलाज़ की सरकारी सुविधा सरकार से मिल सकेगी।
पर अस्पताल पर अव्यवस्था इस तरह से हावी है कि मरीजों को दवाएं और चिकित्सा जाँच तक कि सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
मरीज़ परेशानी में अपने सामान बेच और गिरवी रखकर इलाज़ कराने के लिये मजबूर हैं जो किसी भी सभ्य समाज के लिये बेहद अमानवीय कृत्य है।
अस्पताल के सामने निजी दवाखानों द्वारा समान गिरवी रखवाकर दवाई देने का धंधा खुले आम चल रहा है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण डिलीवरी के लिये आयी महिला के पति को मरीज़ का सामान गिरवी रखकर दवा देने वाली रसीद सामने आयी।

अतः आपसे अनुरोध है कि तत्काल इन अव्यवस्थाओं पर रोक लगायी जाये और यह सुनिश्चित किया जाये कि मरीज़ों को सरकारी अस्पताल के अंदर ही दवा और जाँच सुविधा मिल सके, जो आम नागरिक का अधिकार है।
अगर तत्काल यह कार्यवाही सुनिश्चित न कि गयी तो हम गाँधीवादी तरीक़े से आंदोलन के लिये मजबूर होंगे।

ऋचा सिंह
प्रवक्ता समाजवादी पार्टी

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