रमज़ान की 27वीं रात का बहुत मर्तबा है. इस रात को मुसलमान बहुत ख़ास मानते हैं. ऐसे में इस रात को लोग रात भर जाग कर इबादत में गुजारते हैं. पर जिस तरह से हम और आप सुकून की ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं सबके साथ यही बात नहीं है. फिलिस्तीन के मुसलमानों के लिए समस्याएं ज़्यादा हैं. ये समस्याएं इजराइल की वजह से हैं. इजराइल के दमनकारी रवैये की वजह से फिलिस्तीन के लोग डर और ग़ुरबत की ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं.

मगर ये डर इबादत से नहीं रोक सकता. रमज़ान की इस अहम् रात को फिलिस्तीन के मुस्लमान बड़ी संख्या में एक साथ आये और बैतूल मुक़द्दस में इबादत करने पहुंचे. इजराइल के सैनिकों ने यहाँ घेरा बंदी कर रखी थी लेकिन वो उन्हें रोक ना सके. हौसलों से मज़बूत फिलिस्तीन के लोगों ने बढचढ कर इसमें भाग लिया. एक अनुमान के मुताबिक़ साढ़े तीन लाख लोग मस्जिद में इबादत करने पहुंचे.

यहाँ मुसलमानों ने इजराइल के दमन के ख़िलाफ़ दुआ मांगी. फिलिस्तीन जल्दी से मुल्क का दर्जा पाए इसको लेकर भी दुआएँ मांगी गयीं. पिछले कई दशकों से फिलिस्तीनी मुसलमान अपने बच्चों की कुर्बानियाँ देकर बैतुलमुक़द्दस की रक्षा करते आ रहे हैं,रमज़ान से पहले हुए एक विरोध प्रदर्शन में 62 के लगभग फिलिस्तीनी शहीद होगए थे,और तीन हज़ार के लगभग घायल हुए थे.

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