नई दिल्ली-गोवा,मिजोरम,मेघायल और बिहार में सबसे बड़ी पार्टी को राज्यपाल ने ना बुलाकर सबसे बड़े गठबंधन को बुलाया लेकिन उस समय सभी मीडिया पत्रकारों ने इसे अमित शाह का मास्टर स्ट्रोक बताकर कांग्रेस का मजाक उड़ाया,टीवी पर आने वाले संविधान के जानकर ने भी इसे सही बताया मगर जब बात कर्नाटक की आई वैसे ही मीडिया,संविधान के जानकार के सुर बदल गये.

कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस ने राज्यपाल को 113 विधायको का समर्थन पत्र सौपा है लेकिन इसके बावुजूद राज्यपाल ने ना तो भाजपा और ना ही गठबंधन को सरकार बनाने का न्यौता दिया है,कई जानकारों ने दबी जुबान और कुछ ने खुलकर कहा है कि राज्यपाल मौजूदा स्थति को अधिक समय तय बनाये रखना चाहते है ताकि भाजपा अपना प्लान पूरा करने के लिए अधिक समय पा सके.

इस बीच आम आदमी पार्टी के नेता सोमानाथ भारती ने राज्यपालों की भूमिका पर निशाना साधा है उन्होंने ट्विट्टर पर लिखा-मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा??या तो गोवा मेघालय और मणिपुर के राज्यपाल महोदय ने गलत किया या अब कर्नाटक के राज्यपाल महोदय गलत कर रहे है। दोनों कैसे सही हो सकते हैं?माननीय उच्चतम न्यायालय ऐसा अन्याय चुपचाप देखते रहेंगे?बहुत दुर्भाग्य होगा इस देश का!

वही आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ट्विट्टर के ज़रिये सवाल पूछा.. 113 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी देने के बाद भी राज्यपाल किस बात का इंतज़ार कर रहे हैं? ख़रीद फ़रोख़्त की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसमें राज्यपाल की भूमिका निंदनीय है।

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