दिल्ली

जामिया मिल्लिया में समुदाय विशेष के खिलाफ लगे थे नारे,ABVP पर लगा साजिश करने का आरोप

नई दिल्ली-कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा को लेकर अब कई तरह की बातें सामने आ रही हैं.विपक्ष आरोप लगा रहे हैं कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस तरह के दंगे करवा रही है.वहीं अब इस मामले पर कई खुलासे हो रहे हैं,ताजा मामला सामने आ रहा है कि दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का.आरोप लग रहे हैं कि यहां माहौल बिगाड़ने के लिए एबीवीपी के सदस्यों ने भड़काऊ नारेबाजी की थी.

जानकारी के मुताबिक जामिया विश्वविद्यालय में एबीवीपी के छात्रों ने भड़काऊ नारेबाजी की थी.आरोप है कि एबीवीपी के छात्रों ने जामिया कैंपस के अंदर हिन्दोस्तान में रहना होगा तो वंदे मातरम कहना होगा के भड़काऊ नारे लगाए थे. वहीं इस मामले पर अब जामिया के छात्र नेता भी खुलकर अपनी बात कह रहे हैं.

जामिया मिल्लिया के छात्र नेता मीरान हैदर ने इस मामले पर फेसबुक पर लिखा है-जो दंगा फसाद की घटना कासगंज (यूपी) में तिरंगा मार्च के दौरान घटी है वो हादसा RSS व BJP के लोगो की पूरी तरह से एक साज़ीश के तहत हुआ है.डिस्ट्रिक्ट प्रशासन से बिना परमिशन लेकर तिरंगा मार्च निकाल कर उनका मकसद ही दंगा करवाने का था.25 जनवरी को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भी RSS की ABVP व YUVA के मेंबर्स जामिया में तिरंगा मार्च के दौरान खुलेआम नारा लगा रहे थे कि “अगर भारत मे रहना होगा तो वंदे मातरम कहना होगा.”ये जानते हुए की जामिया एक मुस्लिम माइनॉरिटी सेंट्रल यूनिवर्सिटी है इसके बावजूद इन सांघियों ने जामिया में ये नारा देकर जामिया के स्टूडेंट्स को उकसाने की कोशिश किया था ताकि ये लोग दंगा फसाद करवा सके.

लेकिन इनके बावजूद जामिया के छात्रों ने देश की एकता को ध्यान में रखते हुए सब कुछ खामोशी से सहन कर गए.इन सांघियों के पास जब जनता के मुद्दों व सवालों के जवाब देने के लिए कुछ नही बचता तो ये लोग दंगा फसाद कराने को हर मुमकिन कोशिश व साज़ीश रचते है ताकि देश की एकता व भाईचारा को खत्म किया जा सके.

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