बॉलीवुड में अनेक अभिनेता ऐसे है जो देश के प्रति अच्छी सोच रखते है और समाज का नजरिया बदलने की कोशिश करते हैं.ऐसा नहीं है की सभी ऐसा सोचते हैं पर कुछ अभिनेता और अभिनेत्रियाँ समाज को अच्छी दिशा में ले जाना चाहते है और वो इसलिए कोशिश भी करते हैं.हाल ही में अक्षय कुमार ने एक ‘पैडमैंने’ फिल्म समाज को एक अच्छी दिशा दिखाने के लिए बनाई है उनकी पत्नी के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म अच्छी कमाई करने में सफल हुई.

अक्षय ने इससे पहले भी अनेक ऐसी फ़िल्में बनाई है जिनसे समाज को एक अच्छी दिशा मिलती है.अक्षय कुमार से जब पूछा गया की आपने पीरियड जैसे मामले पर फिल्म बनाने की कैसे सोची तो उन्होंने जो जवाब दिया इसे सुनकर आप भी कहोगे की अक्षय जैसा कोई नहीं है. क्योंकि अक्षय ने हर एक फिल्म में समाज को एक अच्छा सन्देश दिया है.

अक्षय ने कहा की मैं किसी भी तरह की बात करने में शर्म नहीं करता यहाँ तक की अपने बेटे के साथ भी इस तरह के टोपिक पर खुल कर बात करता हूँ.अक्षय के अनुसार जैसा उनके साथ हुआ वैसा किसी के साथ नहीं होना चाहिए.

ऐसी जानकारियां सभी को होनी चाहिए और यह कोई गलत बात नहीं है.अगर इंसान को पूर्णत: जानकारी नहीं होगी तो वो अनेक गलतियाँ करता हैं.अक्षय ने कहा की एक समय था जब उनके पास इतनी शौहरत नहीं थी और ना ही इतनी इज्जत और नाम नहीं था.

उस वक्त एक फिल्म की शूटिंग हो रही थी और उस फिल्म की अभिनेत्री को सेट पर ही पीरियड आ गया था. उसके साथ पहली बार ऐसा हुआ था और उसने अपनी माँ से कहकर प्रोड्यूसर से छुट्टी मांगी पर प्रोड्यूसर ने उन्हें छुट्टी नहीं दी थी.

यहाँ तक की उस अभिनेत्री ने उस दर्द में भी बारिश में कुछ ऐसे सीन दिए थे जो वो नहीं देना चाहती थी. उस वक्त उस अभिनेत्री की आँखों में आंसू थे और मैं चाहता था की शूटिंग रुकवा दूँ पर मेरी वहां सुनने वाला कोई नहीं था.

उस दिन के बाद मैंने इस बात पर इतना अध्ययन तो नहीं किया पर अभी करीब कुछ सालों पहले मुझे यह स्टोरी मिली तो मैंने इस तरह की अनेक जानकारियां जुटाने की कोशिश की तो पता चला की एक लड़की ने इतनी सी बात के लिए आत्महत्या कर ली थी की स्कूल में पीरियड की वजह से लगे दाग को देखकर उसपर बच्चे हंसने लग गये थे.

खैर मैं समाज और अपने बच्चों को भी यही शिक्षा देता हूँ की ऐसा कभी ना करें क्योंकि एक महिला की बराबरी करना हमारे लिए नामुनकिन है क्योंकि वो हर महीने ऐसा दर्द झेलती है.

इसलिए औरतों की इज्जत करनी चाहिए ना की उनका मजाक बनाना चाहिए. अक्सर ऐसा होता है की हम लड़कियों को लड़कों के साथ जज करते हैं. पर सच तो यह है की लड़कियों की बराबरी हम कभी नहीं कर सकते हैं.

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