लखनऊ...मीडिया एक ऐसी जगह है जहां एंकर पूरी तरह से माहौल एक पक्ष के समर्थन में या उसके खिलाफ कर देते हैं.इस वजह से कई बार मीडिया सही चीज़ों को ग़लत तरह से पेश करता है.पिछले सालों में जिस तरह से मीडिया ने कवरेज की है उससे यही लगता है कि मीडिया का एक सेक्शन जान बूझकर कट्टरता बढाने की ओर अग्रसर है.


इसके अलावा जो माहौल मीडिया बना रहा है उससे धार्मिक अलगाव पैदा हो रहा है.मीडिया पिछले दिनों इस वजह से भी आलोचना के घेरे में रहा है कि इसने अल्पसंख्यक संस्थानों की बातों को तोड़-मरोड़ कर इस तरह पेश किया है कि उसे बदनाम किया जा सके.


इसी को देखते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक मीडिया पैनेल बनाने पर विचार कर रहा है.बोर्ड के सदस्यों का मानना है कि आज के दौर में मुस्लिम समाज की बातों को आम लोगों तक अगर ठीक से पहुंचाना है तो मीडिया बहुत बड़ी ज़रूरत है.मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि खुद तो वो मीडिया में किसी को भेजता नहीं है,ऐसे में जिस तरह से मुस्लिम मौलाना डिबेट में भाग लेते हैं और अपनी बात को ठीक से नहीं रख पाते, इससे मुस्लिम समाज को नुकसान हुआ है.


बोर्ड के इस विचार का इस्लामिक स्कॉलर भी समर्थन कर रहे हैं. इससे ये होगा कि कोई भी मुसलमानों का नुमाइंदा होने के नाम पर डिबेट में शामिल नहीं हो सकेगा. उसे इसके लिए अधिकृत होना पड़ेगा. हम उम्मीद करते हैं कि ये काम बोर्ड जल्द ही करेगा जिसके बाद ठीक तरह से मुस्लिम समुदाय की बात मीडिया में रखने के लिए लोग जा सकेंगे.

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