अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी AMU
का बाब-ए-सय्यद गेट

भूखे प्यासे धरने पर बैठे तलबा, ए.एम.यू. स्टूडेंट यूनियन
के सद्र, नायब सद्र, सिकरेटरी, साबिक़ सद्र, साबिक़ नायब सद्र, के बीच..
हाथ में माइक थामे मैं बोलता जा रहा था….
पढ़ता जारहा था……………

एक किनारे इस पूरे मंज़र को क़ैद करते हुये मीडिया के कैमरों के बीच हज़ारों तलबा के हाथों में मोबाइलों के जगमगाते फ़्लैश और AMU ज़िन्दाबाद, सर सय्यद ज़िन्दाबाद की गूँज और नारे चीख़ चीख़ कर कह रहे थे के…AMU सिर्फ़ एक इदारा, एक यूनिवर्सिटी ही नहीं बल्कि AMU हमारी तहज़ीब, हमारी शिनाख़्त और हमारा ग़ुरूर है, और कोई हमारे ग़ुरूर को ललकारे ये हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते..!

AMU का यही जुनून, यही सदाक़त और यही यूनिटी
प्रसाशन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया और प्रसाशन को BHP और संघ के दंगाइयों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कर गिरफ़्तार करके जेल भेजना, और तलबा पर लाठियाँ भांजने वाले ज़िम्मेदार पुलिस आफ़ीसर्स को सस्पेंड करना पड़ा..!

सलाम..
स्टूडेंट यूनियन के सद्र बड़े भाई मशकूर उस्मानी साहब, नायब सद्र भाई सज्जाद सुबहान साहब, सिकरेटरी फ़हद भाई, साबिक़ सद्र बड़े भाई ..फ़ैज़ुल हसन साहब, साबिक़ नायब सद्र बड़े भाई अब्दुल क़ादिर जीलानी साहब, भाई सय्यद माज़िन हुसैन ज़ैदी साहब, भाई फ़रहान ज़ुबैरी, ज़ैद शेरवानी, सुहैल मसर्रत, अबू बक्र और भाई तारिक़ अब्दुल्लाह के जज़्बे और जुनून को,

ये सब वही जियाले साथी हैं जो हादसे के दिन से ही रात-रात भर जागकर और चिलचिलाती धूप में सभी तलबा के साथ सड़कों पर उतरे और प्रोटेस्ट कर प्रसाशन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया,

इन बहादुर साथियों को हज़ारों सेल्यूट..!

शुक्रिया मशकूर भाई, फ़ैज़ुल भाई, क़ादिर भाई, सज्जाद भाई, फ़हद भाई और AMU के सभी तलबा का जिन्होंने मुझे भी अपनी मुहिम और इस बड़ी लड़ाई का हिस्सा बनाया, इंशा अल्लाह आख़री साँस तक जब भी AMU पुकारेगा अपने सभी साथियों के साथ नंगे पाँव खड़ा रहूँगा..!

“हमें ग़रज़ न जिन्ना से न पाकिस्तां से मतलब है
हम हैं हिंदुस्तानी हमको हिन्दुस्तां से मतलब है
हम सर सय्यद वाले तुम सावरकर की औलाद
AMU ज़िन्दाबाद……सर सय्यद ज़िन्दाबाद..!”

शहज़ादा कलीम-

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