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इमरान प्रतापगढ़ी के समर्थको के AMU छात्रनेता पर लगाये गये आरोप का इस पत्रकार ने जवाब दिया

सोशल मीडिया पर शायर इमरान प्रतापगढ़ी और अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन के बीच जंग छिड़ी हुई है दोनों के समर्थक भी इस जंग में उतर आये है सबसे पहले छात्रनेता फैजुल हसन ने इमरान प्रतापगढ़ी का विरोध करते हुए AMU छात्रों को खत लिखा उसके बाद इमरान प्रतापगढ़ी ने इसका सोशल मीडिया के माध्यम से जवाब दिया.

लेकिन इसके बाद दोनों तरफ से कई लोग मैदान में कूद पड़े है,सामाजिक कार्यकर्त्ता मोहम्मद ज़ाहिर,रफ़ीक बेलिम ने छात्रनेता फैजुल हसन पर गंभीर आरोप लगाये इस पर फैजुल हसन के दोस्त एवं पत्रकार निसार सिद्दीकी ने जवाब दिया है,निसार सिद्दीकी ने अपने जवाब में लिखा..
Faizul Hasan भाई की ईमानदारी पर शक करने वालों सुनों मेरी बात। रुपए 3 लाख नहीं बल्कि 10 लाख के करीब हैं। फैजुल हसन करीब 3 बार दिल्ली आए। वह बार बार सीरिया एंबेसी गए वीजा के लिए। लेकिन मौजूदा वक़्त में सीरिया का वीज़ा नहीं मिल रहा है। भारतीयों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार वीजा नहीं दे रही है। Rafique Belim किसी पर इल्जाम लगाने से पहले तथ्यों की जांच कर लिया करो। फैजुल तुम्हें ही पैसे देने को तैयार हैं। आओ और ले जाकर सीरिया के पीड़ितों में तुम ही पैसे बांट देना।

फैजुल का मकसद लोगों की मदद करना है ना की तुम और तुम्हारे इम्मू डार्लिंग की तरह बंदरबाट करना। फैजुल हसन हैसियत में इतने कमज़ोर नहीं की दलाली करनी पड़े। दलाली ही करनी होती तो गवैये को 2.50 लाख रुपए दे दिए होते। मैं गवाही देता हूं कि फैजुल अपने पास से पैसा लगाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। फैजुल तुम जैसे चिंदीचोरों को हिसाब देने नहीं कभी नहीं जाते। ईमानदारी कितनी है ये इस बात से अंदाजा लगा लो कि तुम लोग 3 लाख पर छाती पीट पीटकर रो रहे हो, जबकि फैजुल ईमानदारी से बता रहे हैं कि उनके पास करीब 10 लाख है, वो उनके खाते में नहीं बल्कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र मोहम्मद कासिम के पास है।

Mohd Zahid चाचा मैं तो समझता था कि थोड़ा सी ज़हनियत वाले बात करोगे, लेकिन लोग आपको ज़ाहिल चाचा सही कहते हैं। बेलिम और आप सिर्फ इसलिए फैजुल भाई को गरियाए पड़े हैं क्योंकि उन्होंने इमरान प्रतापगढ़ी की सच्चाई को सामने लाया है। आप हक़ परस्त होते तो ईमानदारी से तथ्यों की जांच परख करते, लेकिन आप लोगों ने फैजुल पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना शुरू कर दिया। इस्लाम कहता है कि जो हक़ पर है वो सच्चा मोमिन है, जाओ मस्जिद जाकर कलमा पढ़ के ईमान लाओ, रोज़े शुरू हो रहे हैं कहीं ऐसा ना हो कि आप लोगों के रोज़े सिर्फ भूखे-प्यासे के लिए ही गिनती हो।
उम्मीद करता हूं कि मेरी पोस्ट से बात समझ आएगी। अगर समझ नहीं आया तो आगरा से शाहदरा शिफ्ट हो गया, वहां चेकअप करवा लेना।

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