मुंबई-सुप्रीम कोर्ट से जुड़े जज विवाद में शनिवार को शिवसेना भी कूद पड़ी.पार्टी प्रमुख उद्भव ठाकरे ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा और न्याय प्रणाली में अनियमितताओं के खिलाफ हुंकार भरने को लेकर जस्टिस जे.चेलामेश्वर समेत चार वरिष्ठ जजों की तारीफ की.उन्होंने यह भी कहा कि कानून को गूंगा और बहरा बनाने की कोशिश की जा रही है.

सरकार को इस मामले में दखल नहीं देनी चाहिए। ठाकरे ने इस बाबत पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा, “उन जजों (चारों की) के फैसले की सराहना की जानी चाहिए.उन चारों के खिलाफ जांच बिठाए जाने की संभावना है.हालांकि, यह जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।” राष्ट्रपति के शहर में आने को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाया.पूछा, “ऐसा क्या महत्वपूर्ण हो रहा है, जो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुंबई शहर आ रहे हैं?”

ठाकरे ने आगे बताया, “न्याय तंत्र को गूंगा और बहरा बनाने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लोग देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा पा रहे हैं? सिर्फ चुनाव जीतना ही प्रशासन करना नहीं है.” उन्होंने आगे बताया, “सरकार को इसमें किसी तरह से भी दखल नहीं देना चाहिए. न्याय तंत्र को उसका काम करने दिए जाए.”

शुक्रवार (12 जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इनमें जस्टिस जे.चेलामेश्वर, रंजन गोगोई, एमबी लोकुर और कुरियन जोसेफ शामिल थे.प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट में दूसरे नंबर के जज जस्टिस जे.चेलामेश्वर ने सीजेआई दीपक मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए थे.देश के इतिहास में इस तरह का घटनाक्रम पहली बार हुआ था.

जस्टिस चेलामेश्वर ने इस दौरान कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासनिक काम सही से नहीं हो रहा है.उनके मुताबिक, “हम चारों मीडिया का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं.यह किसी भी देश के इतिहास में अभूतपूर्व घटना है, क्योंकि हमें इस तरह की ब्रीफिंग करने के लिए विवश होना पड़ा.हमने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इस वजह से की, ताकि बाद में कोई ये न कहे कि हमनें अपनी आत्मा बेच दी.”

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