राजस्थान विधानसभा चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है लेकिन सत्ताधारी भाजपा की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. राजस्थान उपचुनाव में भाजपा को ज़बरदस्त हार का सामना करना पड़ा था. हार इतनी बड़ी थी कि भाजपा के शीर्ष नेताओं में घबराहट आ गयी. असल में भाजपा को डर हार का नहीं है, भाजपा नेता सोचते हैं कि कहीं इतनी बड़ी हार ना हो जाए कि सवाल-जवाब मुश्किल हो जाए.

असल में भाजपा ने हाल ही में अशोक परनामी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया था लेकिन उनकी जगह पर अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी है. इस बारे में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी चिंतित हैं. उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है कि आख़िर राजस्थान की गुत्थी को कैसे सुलझाया जाए. उन्होंने दिल्ली में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और कोर समिति के सदस्यों के साथ बैठक की लेकिन कोई विशेष नतीजा इसका भी ना निकल सका.

बताया जा रहा है कि वसुंधरा राजे अपने राज्य में रमज़ान के लिए इफ़्तार पार्टी भी देने वाली हैं, इसके चलते शायद अब फ़ैसला और टलेगा. राजस्थान भाजपा में उथल पुथल से कांग्रेस उत्साहित है और वो इस बात को समझ गई है कि भाजपा दबाव में है. आपको बता दें कि अशोक परनामी ने 16 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफ़ा डे दिया था. पिछले दो महीने से ये पद ख़ाली है. भाजपा नेता इस बारे में सवाल पूछे जाने पर बगले झाँक रहे हैं और कुछ बोलने से बच रहे हैं. कुछ लोग ये अटकले लगा रहे हैं कि गजेन्द्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है लेकिन भूपेन्द्र यादव के भी समर्थक कम नहीं हैं.

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