नई दिल्ली-जहाँ देश भर के मुस्लिम 16 जून को ईद मनाने जा रहे है वही एक फिरका ऐसा है जो अपनी ईद की नमाज़ 14 जून को अदा कर चुका है.धूमधाम से ईद मनाई जा चुकी है.मुस्लिमो का एक फिरका बोहरा समुदाय है जिसने भारत के विभिन्न हिस्सों में 14 जून को ईद मना ली है.आजमगढ़ के मुबारकपुर में बोहरा समुदाय ने ईद मना ली है.मुबारकपुर के अलावा इस समुदाय का अहमदाबाद,गुना,राजसमन्द,कच्छ और सूरत में14 जून क ईद मनाने का समाचार है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,दाऊदी बोहरा समाज के लोग मिस्री कैलेंडर के हिसाब से दो दिन पूर्व से ही रमजान का रोजा रखते है.ये लोग 30 रोजा पूरा कर दो दिन पहले ईद मनाते हैं.अक्सर इनकी ईद और सुन्नी समुदाय की ईद में दो दिन का फर्क होता है.वही शिया समुदाय से जुड़ा फिरका होने के बाद भी ये लोग शिया समुदाय से पहले ही ईद मना लेते है.


मुबारकपुर में दाऊदी बोहरा समाज के लोगों की तादाद करीब 575 है जो ज्यादातर मुहल्ला पूरा रानी और मुहल्ला पूरा दीवान में है.गौरतलब है कि बोहरा समुदाय की आबादी बहुत कम है,इस समुदाय की भारत में आबादी मात्र एक लाख के आसपास ही है.ये लोग अधिकतर गुजरात के विभिन्न शहरो में रहते है.हलाकि थोड़ी थोड़ी संख्या इनकी भारत के हर बड़े शहर में मिल जाती है.


शिक्षा और व्यापार में आगे है बोहरा समुदाय-बोहरा सामुदाय की दो सबसे प्रमुखखासियत है एक तो अधिकतर बोहरा व्यापारी हैं.इसके अलावा उनके अंदर समुदाय की भावना बहुत ज्यादा होती है.बोहरा समुदाय का मुखिया सैयदना कहलाते हैं.बोहराओं में सैयदना बहुत प्रभावशाली होता है.बोहरा समुदाय अत्यधिक शिक्षित एवं कारोबार में संपन्न है. समुदाय में आपसी सहयोग बहुत ज्यादा है.एक दुसरे की मदद में आगे रहते है.अक्सर एक किचेन से पुरे समाज का खाना बनता है ताकि ये सहयोग की भावना प्रबल रहे.


बोहरा समुदाय से एक विवाद भी जुड़ा है,दरअसल इसी समुदाय में महिलाओ के खतने की रस्म है हलाकि मौजूदा समय में खतना एक रस्मी रिवायत बनके रह गयी है जिसमे एक हल्का सा चीरा नाबालिक लड़की के लगाया जाता है.

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