नई दिल्ली-कर्नाटक विधानसभा चुनाव के पहले जनता दल (सेक्‍युलर) और बसपा में गठबंधन से बसपा को फायदा हुआ है.15 मई को आए नतीजों में बसपा कोल्‍लेगल सीट जीतने में कामयाब रही.पार्टी 25 सालों के बाद कर्नाटक में कोई सीट जीती है.इस गठजोड़ के चलते ही,न तो एचडी देवेगौड़ा और न ही उनके बेटे एचडी कुमारस्‍वामी ने बीजेपी का प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया.2018 के नतीजों में भाजपा बहुमत नहीं हासिल कर सकी. विधानसभा चुनावों में जेडीएस 37 सीटों के साथ तीसरे नंबर की पार्टी बनी है.

बसपा के टिकट से एन महेश पहले विधायक चुने गये है.राज्‍य में आखिरी बार बसपा 1994 में जीती थी जब उसने बीदर पर कब्‍जा किया था.बसपा के लिए कोल्‍लेगल इस लिहाज से भी अहम है कि यहां पर 1 मई को पीएम रेंद्र मोदी प्रचार करने आए थे और राहुल गांधी पर हमला बोला था,मगर देवेगौड़ा की खूब तारीफ की थी.पुराने मैसूर में जेडीएस 27 सीटें जीती हैं.

यहां वोक्‍कालिगा,दलितों और लिंगायतों का प्रभाव है.कांग्रेस को यहां 13 सीटें मिलीं जबकि भाजपा को सिर्फ 10 सीट हासिल हुईं.बसपा के नवनिर्वाचित विधायक महेश ने टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, ”बीजेपी हमें लुभाने की कोशिश कर रही थी क्‍योंकि उन्‍हें पता था कि हम चमराजनगर की यह सीट जीत जाएंगे और पुराने मैसूर में जेडीएस की मदद कर उनकी सीट को नुकसान पहुंचाएंगे.मेरे और बसपा के लिए, यह हार का रिकॉर्ड रहा है और अब एक जीत. मैंने 2004 में चौथे नंबर के प्रत्‍याशी की तरह शुरुआत की थी,2009 में तीसरे नंबर पर रहा, 2013 में दूसरे और अब आखिरकार मैं जीत गया.यह एक लड़ाई है जो हम दलितों ने बसपा के लिए इस राज्‍य में लड़ी है.हम खुश हैं कि बहनजी और देवेगौड़ा जी ने मिलकर दो समुदायों को बसपा-सपा की तरह जोड़ा.”

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