भोपाल-आम आदमी पार्टी के मध्य प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने शुक्रवार को भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इलेक्शन कमीशन अब मोदी कमीशन की तर्ज पर काम कर रहा है.चुनाव आयोग की आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता को खारिज करने की सिफारिश साबित करती है कि यह संवैधानिक संस्था मोदी सरकार के दबाव में फैसला कर रही है.उन्होंने कहा कि जब विधायकों ने एक रुपए का लाभ नहीं लिया,न ही उन्हें कोई ऑफिस,गाड़ी,बंगला या कर्मचारी मुहैया कराया गया तो किस आधार पर यह लाभ के पद का मामला बनता है.

आलोक अग्रवाल ने कहा कि सुनवाई के दौरान आप के विधायकों को सबूत तक नहीं रखने दिए गए और चुनाव आयोग ने एकतरफा फैसला सुनाया है.उन्होंने कहा कि यह इसलिए किया गया कि भाजपा नहीं चाहती कि एक ईमानदार सरकार को दिल्ली की जनता के लिए काम करने दिया जाए.आम आदमी पार्टी की लोकप्रिय सरकार से घबराकर भारतीय जनता पार्टी संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से अपने मंसूबों को कामयाब करने की कोशिश कर रही है,लेकिन भाजपा यह भी जानती है कि वह कितना भी जोर लगा ले, दिल्ली और देश की जनता उसके प्रयासों पर पानी फेर देगी.मौजूदा फैसले से भाजपा पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है.

उन्होंने कहाकि मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति 23 जनवरी को रिटायर होने वाले हैं.रिटायरमेंट के ठीक पहले उन्होंने आनन फानन में यह फैसला दिया है.आज शुक्रवार है और ज्योति जी सोमवार को रिटायर होंगे.इस तरह मामले में जल्दबाजी में लिया गया यह फैसला संदेह पैदा करता है.उन्होंने मध्य प्रदेश का मामला उठाते हुए कहा कि प्रदेश के दो मंत्रियों के खिलाफ लाभ के पद की शिकायत को राज्यपाल ने निरस्त कर दी है.लेकिन राज्यपाल के आदेश के साथ चुनाव आयोग की अनुशंसा की प्रति नहीं दी गई है.इस मामले में भाजपा सरकार तथ्यों को छुपाने की कोशिश कर रही है.

इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी ने जून 2016 में 118 विधायकों के लाभ के पद की शिकायत की थी.इस बारे में आप ने राज्यपाल के समक्ष भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191(1)(क) अनुच्छेद 192 और लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत लिखित में शिकायत भी दर्ज कराई थी.लेकिन इस मामले में आज तक कोई जवाब नहीं दिया गया है.उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश के विधायकों के लाभ के पद के मामले में भी हाई कोर्ट जाएगी.

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