अहमदाबाद:गुजरात को व्यापारियों का शहर कहा जाता है.जहाँ तक बात है टेक्सटाइल इंडस्ट्री की तो सूरत इसका गढ़ है लेकिन इन दिनों सूरत वीरान हो रहा है.यहाँ से रोजाना हजारो मजदूरों का पलायन हो रहा है बहुत से कारोबारियों ने भी शहर छोड़कर दुसरे जगह उद्योग जमाने के लिए पलायन किया है.

मजदूरों का पलायन…

सूरत में लाखो की संख्या में मजदूर है,अधिकतर मजदूर उड़ीसा,यूपी और बिहार से है लेकिन अब पाच हजार मजदूर रोजाना पलायन कर रहे है.अब तक एक पचास लाख से ज्यादा मजदूर पलायन कर चुके है.इसकी वज़ह एक जमाने में दुनिया भर में धाक जमा चुकी टेक्सटाइल इंडस्ट्री का बदहाल होना है.पत्रिका की एक खबर के अनुसार,मजदूरों के पलायन की वज़ह नौकरी की तनख्वाह नही मिलना है वही इस मामले पर मिल मालिक कहते है कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के वजह से उनका कारोबार टूट चुका है इस वज़ह से वे लोग सैलरी देने में असमर्थ है.

मोदी की GST लायी बर्बादी…

मोदी सरकार का कथित रूप से एक देश एक टैक्स का कानून उनके गृह राज्य के शहर सूरत पर भारी पड़ रहा है.सूरत में टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा मार GST की है.हलाकि विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने GST की दरे संशोधित करने की बात कही थी लेकिन ये वादा चुनावी वादा बन गया और ये टैक्स जस का तस बना है.वही पिछले दिनों वित्त मंत्रालय ने साफ़ किया कि GST में किसी तरह का बदलाव नही होगा.मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,सूरत में टेक्सटाइल इंडस्ट्री को अब तक 120 अरब का नुकसान हो चुका है.

महँगी बिजली ने भी दम घोंटा…

गुजरात में उद्योग के लिए बिजली की दरे समान्य से काफी अधिक है.इस वज़ह से इनपुट मटेरियल महंगा होने की वज़ह से बनने वाला सामान काफी महंगा हो चुका है.

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