नई दिल्ली-मलेशिया के सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामी स्कॉलर जाकिर नाइक को देश में रिहाइश देने और स्थायी निवासी (पीआर) का दर्जा देने के खिलाफ मुकदमे को ख़ारिज कर दिया.यह मामला हिंदुस्था के अध्यक्ष पी वेथमोर्ली और 18 अन्य ने दायर किया था. हिंद्राफ के वकील एस कार्थिगेसन ने कहा कि न्यायमूर्ति अज़ीज़ह नवावी ने चैंबर में यह फैसला किया कि सरकार के साथ इस केस में एक पार्टी के रूप में जाकिर नाइक का नाम देना चाहिए था.

जज अजीज़ ने अपना फैसला सुनाते हुए मीडिया से कहा कि नाम न देना मामले को असुरक्षित बना देता है. कोर्ट ने 19 लोगों को सरकार को आरएम 5,000 की लागत का भुगतान करने का भी आदेश दिया है.कार्तिगेसन ने कहा कि समूह फैसले के खिलाफ अपील करेगा.परकासा के अध्यक्ष इब्राहिम अली ने कहा कि वे अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं.पिछले साल मार्च में वेथा और 18 अन्य कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से नाइक को आश्रय देने के लिए सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था.

उन्होंने दावा किया कि मलेशिया में जाकिर नाइक की उपस्थिति देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा थी.पिछले साल, नाइक को मलेशिया में पांच साल के लिए पीआर का दर्जा दिया था.भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कहा कि नाईक ने हिंदू, ईसाई और इस्लाम धर्मों को जानबूझकर अपमानित किया था.भारत में जाकिर नाइक के खिलाफ विभिन्न मामलो में मुकदमा चल रहा है.अपने ऊपर आरोप और मुकदमे के होने के बाद जाकिर नाईक स्वदेश नही लौटे है.

जाकिर नाइक को वापस लाने के लिए इंटरपोल में भी भारत ने प्रत्यारोपण की कोशिश के तहत अपील की थी लेकिन इंटरपोल ने भी भारत सरकार की अपील को ठुकरा दिया तह.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here