नई दिल्ली…हलीमा याक़ूब सिंगापुर की पहली महिला राष्ट्रपति हैं. हलीमा के बारे में अगर हम आपको बताएं तो आपको यकीन नहीं होगा. वो बहुत ग़रीबी में पली बढ़ी हैं और यहाँ तक पहुंची हैं. हलीमा के वालिद सरकारी कर्मचारी थे लेकिन उनकी सैलरी बहुत कम थी. पाँच-भाई बहन वाला बड़ा परिवार होने की वजह से किसी तरह ही घर का खर्चा चलता था. फिर अचानक ही उनके पिता का देहांत हो गया. उनके पिता की तबियत अचानक ही खराब हुई और वो चल बसे.


जब उनके पापा की मौत हुई तब वो महज़ आठ साल की थीं. उनकी माँ कभी घर से बाहर नहीं निकली थीं. एक समय ऐसा भी आया जब घर में राशन भी ख़त्म हो गया और दफ्तर के लोगों ने उनके परिवार की कोई मदद नहीं की. ऐसे में सरकारी क्वार्टर को भी खाली करने का हुक्म आ गया. मोहलत मांगी गयी लेकिन नहीं मिली.


उन्हें एक रिश्तेदार ने सहारा दिया. माँ भी रोज़ी रोटी के लिए भटकीं पर कुछ हासिल न हुआ. हलीमा तब बहुत छोटी थीं लेकिन वो समझ गयी थीं कि उनकी माँ को अभी उनकी ज़रुरत है. ऐसे में माँ ने सड़क किनारे चावल मीट का ठेला लगाया जिसका कोई लाइसेंस नहीं था. हर वक़्त उन्हें ये डर रहता था कि पुलिस न पकड ले.


हलीमा अपनी माँ के साथ इस ठेले पर जाने लगीं और माँ की मदद करने के लिए वो कई बार ग्राहकों के बर्तन को साफ़ कर देती थीं. उन्हों जूठे बर्तन भी साफ़ किये और बाद में पढ़ाई भी करतीं. कुछ इस तरह के संघर्ष की कहानी है हलीमा याकूब की. उन्हें स्कूल में शांत स्वभाव का माना जाता था. जिसने इतनी तकलीफें झेली हों वो ज्यादा हंसने में कैसे मन लगा पाएगी. हलीमा याकूब ने बाद में राजनीति ज्वाइन की और राष्ट्रपति के पद तक पहुँचीं.


सिर्फ 14 प्रतिशत मुस्लिम लेकिन एक मुस्लिम महिला बनी राष्ट्रपति…
सिंगापूर में मुस्लिम समुदाय की आबादी सिर्फ 14 पर्तिशत है लेकिन इसके बाद भी यहाँ एक मुस्लिम महिला राष्ट्रपति बन गयी है.इसके पीछे सिंगापूर में विभिन्न जनसख्या वाले समूहों को रोटेशन के आधार पर राष्ट्रपति पद के लिए आरक्षण देने के सिस्टम के वजह से ऐसा होता है.सिंगापूर में सबसे अधिक 33 प्रतिशत बौद्ध है वही 18 प्रतिशत इसाई,14 प्रतिशत मुस्लिम,18 प्रतिशत नास्तिक के अलावा पाच प्रतिशत हिन्दू है.

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