अब तक महागठबंधन के चार दलों के साथ बनने की चर्चा थी लेकिन अब इसमें एक और दल की एंट्री हो रही है.ये दल कोई और नहीं बल्कि भीम आर्मी है जोकि अब महागठबंधन को समर्थन दे सकती है.बसपा के धुर विरोधी भीम आर्मी ने साथ आने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ दलित वोटों का बिखराव रोकने के लिए इस तरह की कोशिश तेज हैं.यूपी में बड़ी जीत के लिए महागठबंधन भाजपा विरोधी मतों को एकजुट करने की रणनीति बना रहा है.इसलिए भीम आर्मी का भी महागठबंधन समर्थन लेना चाह रहा है.


गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी भी भीम आर्मी मुखिया चंद्रशेखर के काफी करीब रहे हैं और उस समय वह भी मायावती के विरोध में थे.अचानक जिग्नेश के रुख में बदलाव आया है और वो अब मायावती पर नर्म है इसका मायने और कयास लगाया जा रहा है कि अब भीम आर्मी को बसपा प्लस महागठबंधन से कोई दिक्कत नही है.


सूत्रों का कहना है कि यह कांग्रेस से मायावती की करीबी का भी असर हो सकता है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में एक दलित सम्मेलन में जिग्नेश ने कहा, ‘मायावती मेरी बहन हैं.मोदी से उनका कोई संबंध नहीं है.मैं और चंद्रशेखर, मायावती के दाएं और बाएं हाथ हैं.हम दोनों साथ खड़े हो गए तो बीजेपी का कहीं पता भी नहीं चलेगा.’

भीम आर्मी का पश्चिमी यूपी में है प्रभाव

भीम आर्मी दलितों का एक बड़ा संघठन बन चूका है इसका आधार पश्चिमी यूपी के दर्जन भर जिले में है.कैराना उपचुनाव में भीम आर्मी के समर्थन ने रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन को समर्थन देकर महागठबंधन की जीत सुनिश्चित कर दिया था.

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