मुंबई: सोशल मीडिया पर साहित्यिक गतिविधयों के लिए पोपुलर ‘साहित्य दुनिया’ ने अब ज़मीनी स्तर का काम करना भी शुरू कर दिया है. पिछले कुछ महीनों में साहित्य दुनिया ने कई छोटी-छोटी वर्कशॉप की हैं. इसी सिलसिले में ‘साहित्य दुनिया’ ने बीते रविवार भी एक परिचर्चा का कार्यक्रम रखा. ये परिचर्चा ‘साहित्य दुनिया’ और ‘जस्ट बुक्स अँधेरी’ की ओर से रखी गयी थी. इसमें दो विषयों पर चर्चा हुई- ‘हिन्दी साहित्यिक विधाओं में महिलाओं की कमी’ और ‘भाषा का विज्ञान’।

‘हिन्दी साहित्यिक विधाओं में महिलाओं की कमी’ विषय पर राजुल अशोक ने अपने विचार व्यक्त किए जबकि ‘भाषा का विज्ञान’ विषय पर अशोक हमराही ने अपना पक्ष रखा. इस बारे में बात करते हुए राजुल अशोक ने कहा कि महिलाओं ने अलग-अलग विधाओं में लिखा है लेकिन कुछ विधाएँ ऐसी भी हैं जिन पर महिलाओं ने कम या फिर न के बराबर लिखा है।

उन्होंने बताया कि किस प्रकार महिलाओं ने लेखन के क्षेत्र में शुरुआत की। उन्होंने भारत में महिला लेखन को तीन भाग में विभाजित किया- आज़ादी से पहले, आज़ादी के बाद और समकालीन। इस बातचीत में अशोक हमराही ने भी आपका पक्ष रखा और कहा कि महिलाओं को कई बार लिखने का मौक़ा ही नहीं मिल पाता इस वजह से कई कहानियाँ उनके ज़हन में पैदा होकर ज़हन में ही मर जाती हैं।

‘भाषा का विज्ञान’ विषय पर बात करते हुए अशोक हमराही ने कहा कि हर भाषा अपने आप में महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में हिन्दी ही एकमात्र भाषा है जिसकी लिपि में हर आवाज़ मौजूद है। उन्होंने बताया कि किस तरह से ‘स’, ‘श’ और ‘ष’ के उच्चारण में फ़र्क़ है और कैसे इसका सही उच्चारण किया जा सकता है। अशोक ने बताया कि हर शब्द का अपना एक महत्व है। इस बात को उन्होंने ‘ज़िम्मेदारी’ और ‘दायित्व’ में अंतर बताने के साथ समझाया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here