एर्दोगान पोप से मिलने गए तो वहां 2 कुर्सियां थी एक बड़ी और एक छोटी मान्यता ये है कि धर्मगुरु(पोप)के बराबर आज तक कोई शक़्स नही बैठा चाहे वो अमेरिका का राष्ट्रपति ही क्यों न हो बड़ी कुर्सी पोप के लिए थी और छोटी वाली उसके सामने बैठने वाले के लिए ताकि पोप की ताज़ीम लाज़िम आए.

एरदोगान ने ये देख कर छोटी कुर्सी पर बैठने से इंकार कर दिया, एर्दोगान से कहा गया कि दुनिया का कोई भी आदमी हो इसी पर बैठ कर बात करता है चाहे अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रम ही हो,इसका जवाब देते हुए टर्की के राष्ट्रपति अर्दोगान ने कहा या तो पोप खड़े रह कर बात करें या बैठने के लिए मुझे बराबर की कुर्सी लाएं, किसी अमल से किसी पोप की ताज़ीम लाज़िम आए ऐसा मैं नहीं कर सकता, आखिर अर्दोगान के लिए पोप के बराबर की कुर्सी मंगवाई गई और टर्की के राष्ट्रपति पहले शक़्स बने जिन्होंने पोप के बराबर बैठ कर बात की.

एर्दोगान ने पोप से कहा कि तुर्की कैथोलिक सहित सभी धर्मों के लोगों को मानता है, – सद्भाव और शांति में रहना तुक्री का अहम लक्ष्य है. इसी कारण से तुर्की सरकार ने 14 चर्चों और एक आराधनालय को बहाल किया है.दोनों इस बात पर भी सहमत हुए कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाने के लिए संयुक्त कदम उठाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है, और चल रहे मानवीय संकटों के लिए चुप नहीं रहना चाहिए.

बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने जरूशलम, मुख्य रूप से सीरिया में चल रहे शरणार्थियों के संकट, साथ ही आतंकवाद और अंतरस्वास्थ्य संबंधों के विकास पर चर्चा की.पोप फ़्रान्सिस ने जेरुसलम की मौजूदा स्थिति के संरक्षण पर जोर दिया. जैसा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार किया गया है.बैठक के दौरान एक्सनोफोबिया और इस्लामोफोबिया के खिलाफ संयुक्त प्रयासों पर चर्चा की गई, जिसमें दोनों नेताओं ने कहा कि आतंक के साथ इस्लाम को जोड़ना गलत है. इसके बजाय उन्होंने जोर दिया कि सभी को इस झूठी समरूपता को बढ़ावा देने वाली किसी भी उत्तेजक टिप्पणी से बचना चाहिए.

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