अयोध्या विवाद में सुलहनामे के नाम पर मस्जिद को कहीं और शिफ्ट करने की वकालत करने वाले मौलाना सलमान नदवी इस समय चर्चा में है,उन्होंने हालिया वार्ता में मीडिया से ब्यान दिया है कि हमारी शरीयत में इस बात की गुंजाइश हैं कि मस्जिद जहां थी,उसको हटाकर के और कहीं भी बनाया जा सकता है.अगर जहां मस्जिद थी,वहां वो ढहा दी गई और मस्जिद की वजह से झगड़े हैं,और खून बह सकता है और बहा 1992 में, तो इसलिए ऐसी शक्ल में शरीयत का ये हुक्म आसानी वाला है, सहूलियत वाला है, इससे एतमाद पैदा होता है.उस हुक्म को इख्तियार करके मस्जिद की जगह तब्दील कर देना चाहिए.

सलमान नदवी को सुलह में अपनी राय देने का हक है वो आलिम है बोर्ड में एग्जीक्यूटिव मेम्बर रहे है लेकिन अगर वो 1992 के हालात से बचने के लिए अपने द्वारा बनाई गयी सुलह में मस्जिद को हटाकर कहीं और बनाये जाने की बात कह रहे है फिर सलमान नदवी खुद गफलत में है मुस्लिम के लिए इस समय हालात 1992 से भी खराब है.मुस्लिम पर मीडिया एंकर से लेकर सरकार के मंत्री मुस्लिमो के खुलेआम आपत्तिजनक बयानबाजी कर रहे है.बात बयानों तक नही है देश भर में मुस्लिमो के खिलाफ बहुसंख्यक समुदाय में नफरत को बढावा देखने को मिल रहा है.फिर सलमान नदवी 1992 की दुहाई किस तरह से दे रहे है?ऐसा लगता है सलमान नदवी के बारे में ओवैसी का दावा सही है,ओवैसी ने सलमान नदवी पर मोदी के लिए नाचने का आरोप लगाया है.

एक बड़ा सवाल ये उठता है आखिर सलमान नदवी भी उन भगवा संघठनो में शामिल हो गये जो देश के संविधान और नयायपालिका में विश्वास नही करते है,जब बाबरी पक्ष और राम जन्म भूमि के पक्षदर का एक बड़ा वर्ग ये मानता है कि सुलह मुमकिन नही है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना चाहिए फिर सलमान नदवी क्यों नही कोर्ट के फैसले का इनेज़ार कर रहे है?.
फैसल अफाक

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