नई दिल्ली...मीडिया इस तरह से लापरवाह हुई है कि वो पिछले दिनों धार्मिक कट्टरता और उन्माद को बढ़ावा देने में शामिल हो गयी है. कई बार मीडिया के लोग जानबूझकर ऐसे सवाल पूछते हैं जो हिन्दू और मुस्लिम के तराज़ू में तौले जाएँ. मीडिया ने पिछले कई सालों में एक शब्द खोजा “इस्लामिक आतंकवाद”, ये शब्द मुसलमानों को बदनाम करने के लिए ही खोजा गया है.क्यूंकि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है,आतंकी किसी भी धर्म का हो वो असल में आतंकवादी होता है और ऐसा भी नहीं है कि आतंकवाद सिर्फ़ मुसलमान समाज ने फैलाया है, अलग अलग धर्म के लोग अलग अलग समय पर आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं.


हालाँकि मीडिया बड़ी चालाकी से उस हिस्से को हटा देता है. कुछ यही कोशिश एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने की.फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा अपनी आने वाली फिल्म को लेकर प्रेस कांफेरेंस कर रहे थे तभी एक पत्रकार ने सवाल किया कि आपको क्यों लगता है कि मुसलमान नौजवान भटक जाते हैं, जबकि कल ही हिजबुल मुजाहिदीन के 12 लोगो पाए गये हैं.


अनुभव सिन्हा ने कहा कि क्या आप न्यूज़ देखते हैं?अख़बार पढ़ते हैं ? टीवी देखते हैं ? अगर देखते हैं तो आपको मालूम होना चाहिये कि अभी दो दिन पहले आपके ही देश में दो मंत्री उन हिन्दुओं को सम्मानित किया है जो दंगाई हैं, मालूम है आपको? बस जवाब ख़त्म.


सिन्हा ने इसके बाद फिर से कहा,”थोड़ा पढ़ना पड़ेगा दोस्त, पढ़ा कीजिये, इतिहास पढ़िये.” उन्होंने कहा,”आतंकवाद की शुरूआत किसने की ? मालूम है आपको ? किसने की आतंकवाद की शुरूआत, सबसे पहले किसने आतंकवाद की शुरूआत की, जिसने भी की हो लेकिन सच यह है कि आतंकवाद की शुरूआत मुसलमानों ने नही की।” अनुभव सिन्हा ने जिस तरह से पत्रकार को जवाब दिया वो वायरल हो रहा है. असल में जब भी कोई इस तरह की बात करे जो किसी एक धर्म पर टारगेट की गयी हो तो इसी तरह से लोगों को आवाज़ उठानी होगी.

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