नई दिल्ली...सऊदी अरब के बारे में कहा जाता है कि यहाँ क़ानून बहुत सख़्त है। सऊदी अरब में इस्लामिक शरिया के मुताबिक़ फ़ैसले सुनाए जाते हैं और किसी हद तक ईमानदारी से इसका पालन किया जाता है। सऊदी अरब में अगर किसी ने किसी का ख़ून कर दिया तो इसकी सज़ा फाँसी ही होती है। सज़ा ए मौत से बचने के लिए क़ानून में बदला का प्रावधान है, अगर मक़तूल का परिवार क़ातिल से पैसे मांगता है तो वो उसे देने होंगे तभी वो बच सकता है। इसे ब्लड मनी कहा जाता है।


ऐसे ही एक मामले की बात हम करने जा रहे हैं जिसमें एक भारतीय शख़्स ने सऊदी अरब में किसी का ख़ून कर दिया।इसके बाद उस पर मुक़दमा चलाया गया जिसके बाद ये साबित हुआ कि ख़ून उसी ने किया था। 9 साल से ये शख़्स सऊदी जेल में है और अपनी फाँसी का इंतज़ार कर रहा है।


ये मामला लेकिन सिर्फ सऊदी अरब तक नहीं रहा बल्कि भारत की संसद में भी ये मामला गूंजा।इस व्यक्ति का नाम लिम्बादरी है,तब जबकि इस शख़्स को कहीं से कोई आस न थी तब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सऊदी अरब के एक स्थानीय व्यापारी अवाद बिन गुरया अलसमी से बात की।सऊदी अरब में अलअसमी ने 1.3 मिलियन सऊदी रियाल जमा कर लिम्बादरी की सज़ा पूरी कर दी और अब उन्हें जल्द ही भारत वापिस आने का मौक़ा मिलेगा।

उनकी सज़ा माफ़ कर दी गयी है।ये रक़म 23 करोड़ भारतीय रुपये से अधिक है। उन्हें 15-20 दिन में भारत भेजा जा सकता है.सऊदी अरब के इस शेख ने अपनी दरियादिली दिखा कर भारतीयों का दिल जीत लिया है। शेख़ ने भारतीय के बदले रक़म जमा कर के एक मिसाल क़ायम की है।

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