दिल्ली

SC/ST एक्ट में अपने रुख पर सुप्रीम कोर्ट कायम,तुरंत गिरफ्तारी को बताया गलत

नई दिल्ली-केंद्र सरकार ने एससी-एसटी एक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल किया.केंद्र सरकार ने कहा है कि फैसले पर पुनर्विचार हो, फैसले से देश मे अफरातफरी और सौहार्द बिगड़ गया है.केंद्र ने कहा है कि कोर्ट के फैसले ने मुख्य कानून की धाराओं को कमजोर कर दिया है.

ये फैसला संविधान में दी गई शक्तियों के बंटवारे का उल्लंघन है.फैसले का हालिया आदेश कानून का उल्लंघन है और इस आदेश ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है.केंद्र सरकार ने कोर्ट से तुरंत गिरफ्तारी पर रोक का आदेश वापस लेने की मांग की है और कहा है कि कोर्ट कानून में इस तरह बदलाव नहीं कर सकता.कानून बनाना संसद का अधिकार है.संज्ञेय अपराध में एफआईआर पुलिस का काम है.डीएसपी की प्राथमिक जांच के बाद एफआईआर का आदेश गलत है.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर दिए गए दिशा-निर्देशों पर कोई रोक लगाने से इनकार किया था.केंद्र सरकार के रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने कहा था कि हम एससी, एसटी एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस एक्ट के जरिए बेगुनाहों को सजा नहीं होनी चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई से पहले शिकायत की पड़ताल कर ली जाए तो इसमें क्या दिक्कत है.

2 अप्रैल को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल किया.केंद्र सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के बाद इस कानून का उद्देश्य ही कमजोर हो जाएगा.केंद्र सरकार ने कहा है कि अग्रिम जमानत के रास्ते खोलने से इसका अभियुक्त दुरुपयोग करेगा और पीड़ित को धमका सकता है और वो जांच को प्रभावित कर सकता है.केंद्र सरकार ने इस मामले पर खुली अदालत में बहस और सुनवाई की मांग की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था.

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