मुंबई-भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी ने शिवसेना ने एनडीए से अलग होने का एलान किया है,पार्टी ने एलान किया है अब वो लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी,बता दे दोनों पार्टियों में लम्बे समय से मनमुटाव चल रहा है,इस फैसला का महाराष्ट्र की राजनीति पर असर पड़ने की संभावना प्रबल है.

बता दे महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार शिवसेना के समर्थन से चल रही है,केंद्र में भी भाजपा को शिवसेना का समर्थन है लेकिन शिवसेना ने अब साफ संकेत दे दिया है कि वो किसी चुनाव में गठबंधन नही करेगी.शिवसेना ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब युवा नेता और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी की नैशनल एक्जीक्यूटिव का सदस्य बनाया गया है.इसे शिवसेना की विरासत अगली पीढ़ी को सौंपने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है.

शिवसेना ने यह फैसला अपनी कार्यकारिणी की बैठक में लिया है.हालांकि, लंबे वक्त से चली आ रही तल्खी को देखते हुए यह फैसला सामान्य ही माना जाएगा.शिवसेना केंद्र की मोदी सरकार, यहां तक कि राज्य की फडणवीस सरकार की खासी आलोचक रही है.नोटबंदी, जीएसटी जैसे केंद्र सरकार के फैसलों से लेकर हर उस मुद्दे पर शिवसेना अपने सहयोगी पर हमलावर रही, जिसके जरिए विरोधी पार्टियों ने बीजेपी को घेरने की कोशिश की.

तल्खी इस हद तक बढ़ गई कि शिवसेना परंपरागत राजनीतिक विरोधी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ करते नजर आई.बीएमसी के चुनाव भी इस तल्खी के माहौल में लड़े गए.हालांकि, बीजेपी और शिवसेना ने अलग अलग चुनाव लड़ा। चुनाव में बीजेपी ने शिवसेना को इतनी कड़ी टक्कर दी कि शिवसेना ने उस वक्त चुप्पी साधने में ही भलाई समझी और बीजेपी के सहयोग से नगर निगम की सत्ता पर काबिज होने में भलाई समझी.दूसरी ओर, बीजेपी के नेता शिवसेना के तमाम हमलों के बावजूद बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया देते रहे हैं.

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