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अंकित का ‘कसूर’ तो ‘मौहब्बत’ है लेकिन अफराजुल का तो यह भी कसूर नही था

दो महीने में दो खबरें सामने आई हैं, एक राजस्थान के राजसमंद की थी तो दूसरी दिल्ली की। इन दोनों खबरों में दो इंसानों की हत्याऐं हुई हैं.अफराजुल इसलिये मार दिया गया क्योंकि वह ‘लव जिहादी’ था, और अंकित की हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग का होना है.अब सच्चाई की तरफ लौटिये अफराजुल इसलिये मार दिया गया क्योंकि वह मजदूर था और ऊपर से मुसलमान भी था. इसके अलावा उसका कोई कसूर नही थी, अंकित का ‘कसूर’ तो ‘मौहब्बत’ है लेकिन अफराजुल का तो यह भी कसूर नही था कि उसने किसी महिला से प्रेम कर लिया हो. लेकिन फिर भी अफराजुल की नफरत की राजनीति ने निगल लिया.

अफराजुल की हत्या के बाद हत्यारे का महिमामंडन किया गया, उसके समर्थन में रैलियां निकाली गईं, यहां तक कि अदालत की छत के ऊपर भगवा फहरा दिया गया.दो दर्जन पुलिस वालों को हत्यारे के समर्थको ने घायल किया, कोर्ट परिसर में आईपीएस अधिकारी के मुंह पर चांटे मारे गये, सर फोड़ दिया गया.लेकिन अंकित के हत्यारोपियों के खिलाफ वही लड़की खड़ी हो गई है जिसके साथ अंकित का प्रेम प्रसंग था.

प्रेम प्रसंग यह शब्द बड़ा अजीब लगता है. हालांकि शब्द यही होता है, लेकिन माहौल ऐसा बना दिया गया है कि अगर अंकित को किसी सलमा से प्यार हो जाये तो उसे प्रेम प्रसंग कहा जाता है और अगर फैजल को किसी प्रियंका से प्यार हो जाये तो उसे लव जिहाद कहा जाता है. मामला एक ही होता है.इतना दौगलापन लेकर कैसे जी रहे हैं और कैसे दूसरे लोगों को मूर्ख बना रहे हैं यह बात समझ से परे है.

अंकित मार दिया गया, इंसान की जान लेने से बड़ा अपराध कुछ और नही हो सकता.हत्यारों को सजा मिले क्योंकि इंसान की हत्या करने वाला शक्लो सूरत से तो इंसान हो सकता है लेकिन जेहनियत से इंसान नही हो सकता.ये अच्छी बात है कि अंकित के हत्यारों का महिमामंडन नही किया गया है, उनके बैंक अकाऊंट में पैसे जमा कराने के लिये मुहिम नही चलाई गई है, और न ही अंकित के हत्यारों के समर्थन में रैली निकाली गई हैं. और न ही अंकित के हत्यारों को धार्मिक योद्धा करार दिया जा रहा है.और यकीन के साथ कहा जा सकता है कि ऐसा होगा भी नही.

लेकिन हत्या तो अफराजुल की भी हुई उस समय संवेदनाऐं मृतक अफराजुल के साथ नही बल्कि हत्यारे के साथ थीं.यहीं से सवाल पैदा होते हैं और यहीं से दूरियां होती हैं, नफरतें जन्म लेती हैं, और यही नफरतें इंसान से इंसान की हत्या करा देती हैं.सवाल तो यह होना चाहिये कि हिन्दू लड़की और मुस्लिम लड़के के प्रेम प्रसंग को लव जिहाद बताने वाले मुस्लिम लड़की और हिन्दू लड़के की प्रेम कहानी को प्रेम प्रसंग क्यों बताने लगते हैं?
वसीम अकरम त्यागी
(लेखक नेशनल स्पीक वेबसाइट के फाउंडर है)

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