आजकल का संगीत अगर आप लोगों ने सुना हो तो आपको मालूम होगा कि किस तरह का शोर आजकल चल रहा है।एक समय था जब एक से बढ़कर एक गाने आते थे और एक ये समय है कि एक से बढ़कर एक घटिया गाने आते हैं।एक समय था फिल्मी दुनिया में रफी, किशोर, लता, तलत, मुकेश, सुमन कल्याणपुरी जैसे गायक गायिकाएं थे और अब तो खैर जाने दीजिए।

हम आपको उस दौर का एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं जो आपके मन में इनके सम्मान की भावना को और प्रबल कर देगा।एक फ़िल्म आयी थी हाथी मेरे साथी।इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका राजेश खन्ना ने निभाई थी और साथ में तनुजा भी थीं।इस फ़िल्म के गाने बहुत हिट हुए थे और सबसे हिट था ‘नफरत की दुनिया को छोड़कर’ गाना।ये गाना मुहम्मद रफ़ी की आवाज़ में है और फ़िल्म के बाक़ी गाने किशोर की आवाज़ में हैं।

इसके पीछे एक कहानी है, बताया जाता है कि इस गाने को किशोर कुमार ने गाने की कोशिश की लेकिन जो दर्द गाने में चाहिए था वो उनसे नहीं आया। ऐसे में किशोर ने लक्ष्मी प्यारे की जोड़ी को कहा कि वो इस गाने के लिए रफ़ी साहब से बात करें।जब लक्ष्मी-प्यारे रफ़ी के पास गए तो वो फौरन गाने को राज़ी हो गए।

किशोर और रफ़ी दोनों एक दूसरे के कंपटीटर होने के बावजूद एक दूसरे का बेहद सम्मान करते थे।आज कल के दौर में जहाँ हम देखते हैं कि लोग एक दूसरे से मनमुटाव रखते हैं तब के फनकार एक दूसरे का सम्मान करते थे.रफ़ी-किशोर में भी कुछ यही बात थी. इसीलिए उनकी गायकी जितनी मशहूर है उससे कहीं अधिक उनका व्यक्तित्व मशहूर है.

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