नई दिल्लीBJP ने लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज़ कर दी है. पार्टी अमेठी,रायबरेली,आजमगढ़,मैनपुरी,बदायूं,कन्नौज,फिरोजाबाद में विशेष जोर लगा रही है वही यूपी के अलावा उसकी निगाह साउथ की एक सीट पर भी है ये सीट हैदराबाद.पिछले चुनाव में भाजपा यहाँ नम्बर दो पर थी हलाकि इस सीट पर ओवैसी की जीत मुस्लिम बहुलता के वज़ह से होती है.


अमित शाह ने तेलंगाना यूनिट से इस सीट के बारे में फीडबैक माँगा जिसमे उन्हें बताया गया कि मुस्लिम वोटर्स एकजुट होकर असदुद्दीन ओवैसी को मत देते है जिससे ओवैसी जीत जाते है.हैदराबाद में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 60% है.भाजपा ने हैदेराबाद को जीतने के लिए मुस्लिम में से शिया समुदाय को अपनी तरफ करने की रणनीति बनाई है.हैदराबाद में शिया मतदाता कितने है इसकी संख्या ठीक ठाक नही है लेकिन जानकारों के अनुसार हैदराबाद में करीब 6 से 7 प्रतिशत शिया मतदाता है.


भाजपा की कोशिश है कि शिया मतदाताओ को एकजुट करके उनका वोट हासिल करना है जिससे ओवैसी का नुकसान उनका फायदा बने और ये डबल फायदा दे.सूत्रों के अनुसार,भाजपा के सामने परेशानी है कि किसको हैदराबाद से लड़ाया जाये.एक वरिष्ठ नेता के अनुसार,पार्टी के कई नेता मुख्तार अब्बास नकवी को हैदराबाद से चुनाव लडवाना चाहते है हलाकि मुख्तार खुद इसके लिए राज़ी नही है.


पार्टी के कुछ नेताओ ने अमित शाह से कहा है कि मोदी सरकार के इस कार्यकाल में मुख्तार अब्बास नकवी ने मुस्लिम के काफी काम किया है और नकवी दावा करते है कि तीन से पैतीस पर्तिशत मुस्लिम इस बार भाजपा को वोट देंगे.इसके अलावा नकवी शिया समुदाय की भी पसंद है.अमित शाह पार्टी नेताओ के इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करने के लिए कहा है.

दरअसल भाजपा में एक मुस्लिम नेता समेत कई बड़े नेता की मुख्तार अब्बास नकवी से बनती नही,इन नेताओ का सोचना है कि नकवी को हैदराबाद भेज कर सबक सिखाया जा सकता है.वही शाह के बारे में कहा जाता है कि कब वो क्या फैसला लेले ये तो वही जानते है.


क्या है जानकारों की राय…
राजनैतिक विश्लेषक मनीष मिश्रा के अनुसार,हैदराबाद में अभी भी ओवैसी की स्थिति काफी मजबूत है.ओवैसी यहाँ से तभी हार सकते है जब कोई नया मुस्लिम नेतृत्व निकल कर आये लेकिन राजनीति में कुछ कहाँ नही जा सकता है.

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